पूर्णागिरि रोपवे में तकनीकि खामी आड़े आ रही
चम्पावत
मां नंदा सुनंदा महोत्सव में कदली वृक्ष का आगमन हुआ। केले के पेड़ से मां नंदा सुनंदा की मूर्तियों का निर्माण किया गया। बाद में विधि विधान से मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। बालेश्वर मंदिर में रविवार सुबह से शुरू हुआ धार्मिक अनुष्ठानों का दौर अर्द्धरात्रि तक जारी रहा। चम्पावत के मां नंदा सुनंदा महोत्सव में धार्मिक अनुष्ठानों की धूम मची है। महोत्सव के चौथे दिन कदली वृक्ष को रौरुयूड़ा से बालेश्वर मंदिर लाया गया। इन कदली वृक्ष को बीते शनिवार को देव डांगरों ने चिन्हित किया था। रविवार सुबह करीब सात बजे देव डांगर देवी लाल वर्मा, प्रकाश पटवा, शान्ति पटवा, तारा पटवा, हरिप्रिया पटवा, गौरव वर्मा, सौरभ वर्मा, विवेकानंद बिष्ट, रवि पटवा अवतरित हो कर बालेश्वर मंदिर से रौरुयड़ा पहुंचे। यहां से कदली वृक्ष बालेश्वर मंदिर लाया गया। इस दौरान महिलाओं ने छतों व छज्जों से पुष्प और अक्षत वर्षा की। बालेश्वर नौले में देव डंगरियों के स्नान के बाद केले के पेड़ से मां नंदा सुनंदा की मूर्तियों का निर्माण किया गया। इसके बाद मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति निर्माण के साथ ही विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा हुई।
