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जाति का विमर्श संवैधानिक व लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है, राजद नेता ने सिसौदिया को दी नसीहत

नई दिल्ली

दिल्ली में कथित शराब घोटाले को लेकर सीबीआई की जांच का सामना कर रहे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अब अपनी जाति को ढाल बना लिया है। भाजपा पर श्ऑफरश् देने का आरोप लगाने वाले सिसोदिया ने खुद को महाराणा प्रताप का वंशज और राजपूत कहते हुए पलटवार किया है। भाजपा ने भ्रष्टाचार के केस में जातिकार्ड खेलने को लेकर श्आपश् की आलोचना की है। अब लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी इस पर सवाल उठाए हैं।
राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा मनीष सिसोदिया ने दो चीजें कही हैं, पहली कि भाजपा ने उन्हें संदेश दिया है कि आप आ जाओ श्आपश् को तोड़कर, सारे मुकदमे वापस हो जाएंगे, यह बहुत गंभीर आरोप है, क्योंकि हमने ऐसा देखा है। एक राज्य के मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप थे, वह भाजपा में शामिल हुए और आरोप हवा में काफूर हो गए। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। दूसरी चीज जो मुझे बुरी लगी, आहत कर गई कि आज आजादी के 75वें वर्ष में हम फलाने के वंशज हैं, हम फलानी जाति के हैं, यह विमर्श हमारे लोकतांत्रिक संवेदनाओं के अनुरूप नहीं है, संविधान सम्मत भी नहीं है। कम से कम मनीष सिसौदिया से ऐसी उम्मीद नहीं थी।
इससे पहले मनोज झा ने नसीहत दी थी कि जब विपक्षी नेताओं पर छापे पड़ते हैं, तो श्आपश् को चुप्पी नहीं साधनी चाहिए। उन्होंने कहा आम आदमी पार्टी को भी यह तय करना होगा कि जब विपक्ष के दूसरे नेताओं पर छापे पड़ते हों तो आप भी बोलना सीखिए, आज हम बोल रहे हैं न आपके लिए, लेकिन जब दूसरों पर होता है तो आप चुप्पी साथ लेते हैं। इस तरह एकांकी सोच से किसी को कुछ नहीं हासिल होगा। हम सबको एक संदेश देना है, कि राजनीतिक लड़ाई राजनीति से लड़िए, जोकि केंद्र की सत्तासीन पार्टी नहीं लड़ना चाहती है।