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बिहारीगढ़ में 200 करोड़ की लागत से बनेगा कारखाना

देहरादून

उŸाराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून के पास गांवों से घिरे छोटे से शहर में बिहारीगढ़ में 200 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश के साथ इवार एग्रो अत्याधुनिक बाजरा-आधारित खाद्य उत्पाद परियोजना स्थापित करेगा, इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और इस पहाड़ी राज्य को दशकों पुरानी शहरों की ओर पलायन जैसी समस्या से लोगों को निजात मिल जाएगी। परियोजना के तहत इवार एग्रो बाजरे के बिस्कुट और कुकीज बनाएगा। यहां कंपनी के संस्थापक और प्रबंध निदेशक विजय गुप्ता ने कहा है कि कंपनी का अनुमान है कि परियोजना के पूरी क्षमता से काम करने पर इसी साल त्योहारी सीजन में उŸाराखंड के साथ ही देश के लोगों को श्रीअन्न यानी मोटे अनाज बाजरा से बने स्वादिष्ट व्यंजनों को चखने का मौका भी मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि इवार एग्रो का उद्देश्य बाजरा आधारित उत्पादों को देश भर में बाजार उपलब्ध कराना भी है इसी की कड़ी में बाजरा बिस्कुट बनाने का काम हाथ में लिया जाएगा। कंपनी बाजरा आधारित खाद्यान्न बनाने के प्लांट को 1,000 टन मासिक उत्पादन क्षमता के साथ शुरू करेगी। इस अवसर पर कंपनी के संस्थापक और प्रबंध निदेशक विजय गुप्ता का कहना है कि इवार एग्रो मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड की किसान-र्केंीित परियोजना बिहारीगढ़ में 15 एकड़ जमीन पर शुरू की जा रही है। उन्होंने बताया कि 2022 में भारत ने संयु७ राष्टन्न् महासभा से 2023 को अंतर्राष्टन्न्ीय मिलेट वर्ष के रूप में मान्यता दिलाई है। उल्लेखनीय है कि भारत में बाजरा खरीफ फसल है। उन्होंने कहा कि इसे उगाने में अन्य फसलों की तुलना में कम पानी और अन्य óषि आदानों की आवश्यकता होती है और भारत में आमतौर पर खरीफ में उगाए जाने वाले बाजरे की फसलें देश के अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग नाम से उगाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि इनमें बाजरा, मोती बाजरा, रागी यानी उंगली बाजरा, झंगोरा अर्थात बार्नयार्ड बाजरा, बैरी यानी प्रोसो या सामान्य बाजरा, कांगनी यानी लोमड़ी, इतालवी बाजरा और कोदरा अर्थात कोदो बाजरा शामिल है। इसके अलावा राजस्थान समेत दक्षिणी राज्यों में मोटे अनाज के तौर पर ज्वार भी उगाया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नर्रेंी मोदी ने साफ कर दिया है कि वह इस अवसर ह्अंतर्राष्टन्न्ीय मिलेट वर्ष Ω का उपयोग जन आंदोलन बनाने और भारत को मिलेट का वैश्विक र्केंी बनाने के लिए करना चाहते हैं। आने वाले समय में बिहारीगढ़ के लोग इवार एग्रो के साथ इस आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का दावा कर सकेंगें।