उत्तराखण्ड

राज्य बनने से लेकर आज तक चल रहा था विस बैकडोर भर्ती घोटालाः अभिनव

देहरादून,

सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर का कहना है कि विधानसभा बैकडोर भर्ती में भ्रष्टाचार व अनियमितता का घोटाला वर्ष 2000 में राज्य बनने से लेकर आज तक चल रहा था। जिस पर सरकारें लगातार अनदेखी कर रही थी। आज परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि अतः विधानसभा भर्ती में राज्य निर्माण के वर्ष 2000 से वर्ष 2022 तक समस्त नियुक्तियों की जाँच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में किया जाय और भ्रष्टाचार से नौकरी देने वाले मंत्री, अफसरों से सरकारी धन की रिकवरी किये जाने की मांगांे पर जनहित याचिका विचाराधीन हैं। इस अवसर पर अभिनव थापर की इस जनहित याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल ने गंभीर संज्ञान लेते हुए सरकार को 8 हफ्ते में जवाब तलब कर बड़ी कार्यवाही की है, पर दुर्भाग्यपूर्ण है कि 10 हफ्ते बीत जाने के बाद भी सरकार ने अभी तक न्यायालय को कोई जवाब नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि किन्तु कल भाजपा के पूर्व सांसद, पूर्व कानून मंत्री व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर व अपने सोशल एकाउंट से ट्वीट कर विधानसभा से निलंबित 228 कर्मचारियों के पुनः बहाली हेतु आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड के युवाओं के हितों एवं हक-हकूक पर कुठाराघात हुआ है। उन्होंने कहा कि कई सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि 2022 में नियुक्ति प्रदान की गई थी, जिसमें तत्कालीन स्पीकर व वर्तमान कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, भाजपा संगठन मंत्री अजय कुमार आदि के रिश्तेदारों को भी नियुक्ति प्रदान की गयी है। इस अवसर पर याचिकाकर्ता अभिनव थापर ने पूर्व कानून मंत्री डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी से आग्रह है कि विधानसभा भर्ती घोटाले पर जनहित याचिका के निर्णय आने तक अपना मांग-पत्र वापिस लें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का युवा सिर्फ पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक में संलिप्त सभी दोषियों को सजा दिलाने के लिए सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। इस अवसर पर विजयपाल रावत भी मौजूद रहे।