पीएम मोदी को ज्ञापन देने जा रहे उक्रांद नेता कर्णप्रयाग तहसील में नजरबंद
देहरादून
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ और बद्रीनाथ धामों में दर्शन लाभ लिया और कुछ योजनाओं का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उत्तराखंड क्रांति दल के प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व करते हुए बद्रीनाथ जाना था और हम कल सुबह रुद्रप्रयाग से बद्रीनाथ के लिए चल पड़े थे। पहले तो हमारे युवा नेता मोहित डिमरी को तिलवाड़ा पुलिस चौकी में रोका गया, किसी तरह पुलिस ने अपने जनपद से बाहर चमोली को जाने की अनुमति तो दे दी परंतु गौचर पुलिस थाने को हमारे चमोली जिले में प्रवेश करने की सूचना दे दी। इस अवसर पर दल के केन्द्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एपी जुयाल ने बताया कि परिणाम स्वरूप गौचर पहुंचते ही पुलिस द्वारा हमें रोक लिया गया और हमें बद्रीनाथ जाने का अनुमति पत्र दिखाने को कहा गया। उन्होंने कहा कि हमने पुलिस ने बहुत अनुरोध किया कि हमें गोपेश्वर जिला मुख्यालय तक जाने दें हम जिलाधिकारी या प्रोटोकॉल अधिकारी से मिलकर प्रधानमंत्री से मिलने की अनुमति ले लेंगे और अनुमति न मिलने की स्थिति में अपना ज्ञापन किसी भी मजिस्ट्रेट को सौंप कर वापस आ जायेंगे। उन्होंने कहा कि परन्तु हमें पुलिस के घेरे में कर्णप्रयाग तहसील में नजरबंद कर लिया गया। उप जिलाधिकारी एवं ड्यूटी पर तैनात प्रभारी पुलिस निरीक्षक द्वारा जानकारी दी गई कि कर्णप्रयाग से आगे गोपेश्वर, चमोली, जोशीमठ कहीं पर भी जिला मुख्यालय, तहसील मुख्यालय अथवा पुलिस थाने, चौकियों पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं है सभी अधिकारी बद्रीनाथ गये हैं, और हमें कर्णप्रयाग में ही अपना प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी कर्ण प्रयाग को सौंपने को विवश किया गया। उन्होंने कहा कि हम दिन भर लोकतांत्रिक तरीके से धरने पर बैठ गए और अंत में जब प्रशासन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा की दृष्टि से अपनी विवशता जाहिर की तो हमने अपना ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंप दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि हम संख्या बल में बहुत बड़ी भीड़ भी होते तो भी हमारा ज्ञापन किसी मजिस्ट्रेट के माध्यम से ही दिया जाना था परन्तु क्या राज्य की भाजपा सरकार इतनी डरी हुई है कि किसी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने नहीं देना चाहती ताकि उनके कुशासन, भ्रष्टाचार, घोटालों की जानकारी प्रधानमंत्री को न मिल सके या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने ही देश में इतने असुरक्षित हैं कि उन्हें बद्रीनाथ व केदारनाथ जैसे शांत, लगभग आबादी विहीन क्षेत्रों में भी इतना खतरा है। सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों की भीड़ जमा कर ली।
