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यूपी में पर्यटन विकास का नया अध्याय

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि’ गीता का यह श्लोक एक मंत्र के रूप में प्रतिष्ठित हुआ है। जिसने भी इस मंत्र को अंगीकार किया, उसका उद्धार हुआ है। आजादी के अमृत महोत्सव के क्रम में प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों से जिन पंचप्रणों से जुड़ने का संकल्प लेने के लिए कहा था,उन्हीं पंचप्रणों के माध्यम से भारत दुनिया में एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों का सम्यक पालन करे,तो आजादी के शताब्दी महोत्सव तक भारत दुनिया की प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित हो जायेगा। अमृतकाल भारत को महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का स्वर्णिम अवसर है।