उत्तराखण्ड

सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट संघर्ष का आह़वान

देहरादून। कांग्रेस, वामदल समेत कुछ राजनीतिक दलों ने संयुक्त रूप से सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार दिया और एकजुट होकर विरोध करने पर जोर दिया। रविवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा की अध्यक्षता में राजीव भवन में सवर्दलीय बैठक में राज्य के हालात पर चिंता जताई गई। माहरा ने कहा कि आज सभी को समाज को तोड़ने तथा नफरत की राजनीति के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा। मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न से आम आदमी का ध्यान हटाने के लिए भाजपा साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करने का प्रयास कर रही है। सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर भाजपा की देश व प्रदेश सरकारों की जनविरोधी नीतियों से लड़ना होगा। सीपीआई के राष्ट्रीय काउंसिल के सदस्य समर भंडारी ने कहा कि उत्तराखंड के 71 प्रतिशत मूल निवासी लोग वन भूमि पर सदियों से बसे हुए हैं। आज सरकार उन्हें बेघर करने की कोशिश कर रही है। इसका विरेाध होना जरूरी है। सीपीआईएमएल के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि सरकार अतिक्रमण हटाने के नाम पर अपना नफरती ऐजेंडा फैलाना चाहती है। सीपीआई के सहायक सचिव राजेन्द्र नेगी ने कहा कि सरकार वनों से अतिक्रमण हटाने के नाम पर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण कर रही है। कांग्रेस एक मजबूत विपक्ष है। कांग्रेस को बडा आंदोलन छेड़ना होगा। इसमें सभी कांग्रेस के साथ चलेंगे। सीआईटीजी के राज्य सचिव लेखराज, हरजिंदर सिंह-जनता दल, नरेश नौड़ियाल-परिवर्तन पार्टी ने भी विचार रखे। बैठक का संचालन मुख्य प्रवक्ता गरिमा महरा दसौनी ने किया।
रहे मौजूद: सीपीआई के रविन्दर जग्गी, सीपीआई के एसएस राजावत, चेतना मंच के शमशेर गोपाल, सीपी शर्मा, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकान्त धस्माना, नवीन जोशी, शांति रावत, आशीष नौटियाल, नवनीत सती, शीशपाल बिष्ट, कुंवर सजवाण, आईटी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष विकास नेगी आदि उपस्थित थे।