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स्मैक के सेवन से युवा व किशोर कर रहे जीवन बर्बाद

रिपोर्ट: अरमान अहमद

स्मैक से अधिकाँश युवा , छात्र ,किशोर अपना जीवन बर्बाद कर  रहे है। स्मैक  ऐसा सफेद  नशा है| जिसके कारण न जाने कितने घर बर्बाद हो चुके है। और न जाने कितने युवा व किशोर इसकी चपेट में आकर अपनी जीवन लीला स्वाह:  कर चुके है। प्राय देखने में आता है की इसकी  गिरफ्त में अधिकाँश युवा वर्ग आ रहा है। जब नशे के लिए पैंसा नहीं बचते तो वो घर का सामान बेचने में लग जाते है। उसके बाद की स्तिथि सबसे भयावाह होती है।जब नशे के लिए व्यक्ति अपराध तक करने लगते है। जिले में  काफी स्थानों के युवा बहार से नगर व ग्रामीण क्षेत्रों  में स्मैक लाकर बेच रहे है। यह युवक कम से कम ५०० रुपय की स्मैक देते है। और अधिकतम कितनी भी उपलब्ध करा  देते है। जिससे युवा वर्ग इसमें पढ़कर अपना जीवन बर्बाद कर रहा है धीमा ज़हर स्मैक शहरी छेत्रो के साथ साथ ग्रामीण छेत्रो में भी पेर पसार रहा है। हज़ारो युवाओ को इसकी लत लग चुकी है।  चंद पैसो के लालच में स्मैक की सप्लाई क्षेत्र के लोग ही कर रहै है। नशे के सौदागर  पुड़िया ५०० से लेकर ६०० तक की देते है। और एक ग्राम की कीमत ३००० रूपए है यानी ३०००० रूपए तोला ।

स्मैक लेने के तरीके

स्मैक लेने के तरीको को देखा जाए तो इसका धुवा अंदर लिया जाता है। कुछ व्यक्ति  इसका सेवन इंजेक्शन में अविल वाइल और एम्पुल में स्मैक मिलाकर करते है।कुछ मेडिकल स्वामी ब्लैक से  युवा व् किशोरों को यह आसानी से  उपलब्ध करा रहे है।

लत के लक्षण 

स्मैक लेने वालो में अलग अलग तरह के लक्षण देखे जाते है। जैसे की घबराहट , बैचेनी , चिड़चिड़ापन,   गुस्सा आना ,मूड बदलना ,तनाव और मानसिक थकावट ,फैसले लेने में दिक्कत ,याददाश्त कमज़ोर पड़ना  , नींद न आना , सर में तेज़ दर्द , शरीर में तेज़ दर्द  और ऐठन ,मरोड़ होना , भूख न की बराबर लगना ,धड़कन का बढ़ना , ज़्यादा पसीना आना , बिना बीमारी के उलटी दस्त होना आदि।

स्मैक के नुक्सान

स्मैक का नशा करने वालो के परिवार  में कलह होनी शुरू हो जाती है। और आपसी रिश्ते खराब होने लगते हैं। कई बार नशा तलाक की वजह बनता है। और कई परिवार बिखर जाते है पहले नशे पर उसके बाद इलाज पर फ़ालतू पैसा खर्च होता है। क़ाम धंधा छूट जाता है। पैसे की तंगी होने पर नशा करने वाले चोरी और अन्य तरह के अपराध की दुनिया में कदम रखते है।

स्मैक से बचने के उपाय

स्मैक की तलब हो तो इनकी जगह इलायची ,सोंफ आदि ले सकते है। नशे के आदि हो चुके लोगो का दो तरह से इलाज किया जा सकता है। पहले तरीके में लोग अपने नार्मल रूटीन को चालु रखते हुए समय समय पर चिकित्स्क (साइकाइट्रिस्ट) से इलाज करा सकते है। और  छोड़ने के लिए पक्का इरादा करे  जो भी इस प्रकार के नशे करता है। उनसे दूर रहे और हर प्रकार के सम्बन्ध ख़त्म कर दे दुसरे तरीके में मरीज़ को अस्पताल या रिहैब सेण्टर में रखना पड़ता है।  जहा मरीज़ का दवाइयों के साथ साथ अन्य तरीके से इलाज किया जाता है।  विकास शील देश भारत के लिए यह गंभीर समस्या है। इसका परिणाम भयावह है। नशाखोरी से जुडी समस्याओ के चलते हर साल आत्महत्या करने वालो लोगो की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है ।